google.com, pub-1670991415207292, DIRECT, f08c47fec0942fa0 सपना - The Dream (Poem by Priya Upadhyay) - Hindi Top News| हिंदी टॉप न्यूज़

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सपना - The Dream (Poem by Priya Upadhyay)

हर सुबह अपनी खिड़की के बाहर जब मैं नजरें घुमाता हूँ,
सपना आज भी नही टूटा सोच कर मन बहलाता हूँ,
खाली सड़क देख दौड़ जाने का मन करता है,
जिंदगी को ना पिछे छोड़ दू, इस बात से दिल डरता है,
ये आराम, ये छुट्टी यही सब तो
मैं हमेशा से चाहता था,
अब सब समझ आया पिंजरे
में बंद पंछी क्यूँ चिखता
चिल्लाता था,
निकलूं बाहर इस घर से,मम्मी
पापा और दोस्तों से मिलने
को दिल कहता है,
बाहर एक अदृश्य खतरा है,
मेरे इस ही गलती के इन्तजार
में बैठा है,
सिर्फ मैं अकेला नहीं मेरे तरह
करोड़ों और मजबूर है,
नतमस्तक हूँ उनके आगे जो
हम करोड़ों को बचाने के लिए
अपने घरो से दूर है,
इसलिए कभी विडियो काॅल
कभी चैटिंग कोई वेब सिरिज
या कोई फिल्म अब इस चार दिवारों में ही खुशियाँ ढुढ़
लेता हूँ,
कल सायद ये बुरा सपना टूटेगा
सोच कर फिर आँखे मूंद
लेता हूँ,

- प्रिया उपाध्याय



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