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Varanasi Top News: ‘वन्दे भारत’ एक्सप्रेस शनिवार को ट्रायल रन के लिए वाराणसी पहुंची

मेक इन इंडिया प्रोजेक्ट के अंतर्गत पूरी तरह से भारत में निर्मित ‘वन्दे भारत’ एक्सप्रेस शनिवार को ट्रायल रन के लिए वाराणसी जंक्शन पहुंची। इस ट्रेन की स्पीड 130 किलोमीटर प्रति घंटा रही। इस दौरान प्लेटफार्म नंबर एक पर पहुँचने पर इस ट्रेन का निरीक्षण जीएम उत्तर रेलवे टीपी सिंह ने किया। उसके बाद यह ट्रेन प्लेटफार्म नंबर एक से 2 बजकर 45 मिनट पर नई दिल्ली के लिए रवाना हुई।

130 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से पहुंची बनारस 
इस सम्बन्ध में बात करते हुए उत्तर रेलवे के जीएम टीपी सिंह ने बताया कि भारत की यह बहुप्रतीक्षित ट्रेन जल्द ही वाराणसी से नई दिल्ली के बीच चलेगी। आज इसका फाइनल ट्रायल रन किया गया है। ट्रेन 130 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ़्तार से नई दिल्ली से कानपुर, प्रयागराज से होते हुए मिर्ज़ापुर, विन्ध्याचल, ब्लाक हट, जीवनाथपुर, व्यासनगर, काशी होते हुए वाराणसी जंक्शन पहुंची है।

100 करोड़ की लागत से बनी है ये ट्रेन
इसके बाद यह ट्रेन अपने निर्धारित समय से नई दिल्ली के लिए रवाना हुई है। इस ट्रेन की खासियत के बारे में बात करते हुए जीएम ने बताया कि यह सेमी हाई स्पीड ट्रेन 100 करोड़ की लागत से चेन्नई में बनाई गई है। यह गाड़ी 15 प्रतिशत समय और 30 प्रतिशत विद्युत की बचत करने में सक्षम है। इस पूरी ट्रेन में 16 डिब्बे हैं, जिनमे कुल मिलाकर 1128 सीटें हैं।

वाई-फाई, जीपीएस सहित कई सुविधाएं
जीएम उत्तर रेलवे ने बताया कि इस ट्रेन के अन्दर वाई-फाई, जीपीएस आधारित सूचना प्रणाली, आलिशान बोगियों का इंटीरियर डिजाइन के अलवा हर बोगी में सीसीटीवी कैमरे की सुविधा है। इसके अलावा डीफ्यूज़ एलईडी लाइट्स, हर सीट के पीछे चार्जिंग पॉइंट, सभी के लिए टच आधारित रीडिंग लाईट, बायो टॉयलेट, टच वाटर पॉइंट, उपस्थित यात्रियों और मौसम के अनुसार तापमान को कम ज्यादा करने में सक्षम मौसम नियंत्रण प्रणाली जैसी सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी।

दुर्घटना होने पर डिब्‍बे नहीं चढ़ेंगे एक दूसरे के ऊपर
उन्होंने बताया कि 16 कोच वाली इस ट्रेन में 12 कोच चेयरकार होंगे, जिसकी क्षमता 78 सीटों की होगी। इसके अलावा दो डिब्बे एक्ज़ीक्यूटिव क्लास के होंगे जिनकी क्षमता 52 सीट और दो ड्राइविंग डिब्बे जिनकी क्षमता 44 सीट की होगी। उन्होंने बताया कि इस ट्रेन के डिब्बे दुर्घटना के दौरान एक दूसरे पर न चढ़ें उसके लिए भी व्यवस्था की गई है और दो कोचों के बीच रिजिट कम्प्लिन लगाईं गई है।

दरवाजे बंद रहेंगे तभी चलेगी ट्रेन 

इसके अलावा इसके डोर स्वचालित हैं जिसका कंट्रोल ड्राइवर के पास है। चलती ट्रेन में ये दरवाज़े किसी भी हाल में नहीं खुलेंगे ट्रेन के रुकने के बाद ही इसे खोला जा सकेगा।@विकास राय



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