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नाम बदलने की राजनीति

आज उत्तर प्रदेश में नाम बदलने का फैशन जोरों से चल रहा है सरकार पुराने शहरों के नाम को बदलकर नया नामकरण रही है।
अभी उत्तर प्रदेश सरकार ने मुगलसराय का नाम बदलकर दीनदयाल नगर कर दिया इलाहाबाद का प्रयागराज एवँ फैज़ाबाद का अयोध्या कर दिया।
आज उत्तर प्रदेश की हालत बेहद खराब है लगभग सभी क्षेत्रों में चाहें वो शिक्षा हो या रोजगार या बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं।

 रोजगार के लिये युवा धक्के खा रहा है मगर फिर भी उसे अच्छा रोजगार नहीं मिल रहा आज उत्तर प्रदेश में 21 लाख 39 हजार 811 श्रम विभाग में पंजीकृत बेरोजगार है अगर प्रदेश में किसी विभाग में चपरासी की 200 वेकेंसी निकली तो लगभग 1 लाख छात्र अप्लाई करते है जिसमें पीएचडी, बीटेक की डिग्री हासिल किये हुये छात्र भी होते है।
अभी कुछ दिनों पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा था की प्रदेश में रोजगार की कमी नहीं बल्कि योग्य उम्मीदवार नहीं है। जहां तक मेरे खयाल से प्रदेश के हर जिलों से लगभग सैकड़ो पीएचडी किये युवा और हज़ारों बीटेक और अन्य ग्रेजुएट किये युवा मिल जायेंगे जो उचित रोजगार के अभाव में दूसरे प्रदेश में कॉल सेंटर और छोटी छोटी कम्पनियों में नौकरी कर कमा रहे है। सरकार को सभी को सरकारी नौकरी ना सही कम से कम अच्छी प्राइवेट कंपनियों में निकली वेकेंसी से युवाओं को अवगत कराना चाहिए जिससे युवाओं को भी ऐसा लगे कि हमने जिस सरकार को चुना वो हमारे साथ हर कदम पर खड़ी है। मगर यहाँ बिल्कुल उसका उल्टा हो रहा है युवा को रोजगार देने की बजाय किसी शहर का नाम बदल दिया जा रहा है जैसे उसके पुराने नाम की ही वजह से वहां के युवा बेरोजगार थे।

इसके साथ ही स्वास्थ्य का भी हाल बद्तर है अभी प्रदेश में पिछले वर्ष ही गोरखपुर बी० आर० डी० मेडिकल कॉलेज में 2 महीनों में कुल 851 मासूम बच्चों की मौत हो गई थी। जिसपर उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सिदार्थनाथ सिंह ने विवादित बयान दिया था कि अगस्त महीने में बच्चें मरते है। क्या ये सही है कि कोई किसी के मरने पर उसके साथ संवेदनाएं न व्यक्त करके बल्कि उसका मजाक उड़ाये क्या लोगों ने चुनाव में सरकार को इसी के लिये चुना था। आज प्रदेश में कुल 821 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र है जिसमें एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 30 बेड है। यानी पूरे प्रदेश के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कुल 24630 बेड है। जोकिं ये बहुत बड़ी चिंता का विषय है कि अगर किसी एक जिले में कोई बीमारी फैलती है तो लोगों को सरकारी अस्पतालों में भीड़ के कारण प्राइवेट अस्पतालों में जाना पड़ता है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 के अनुसार प्रत्येक सरकारी अस्पतालों में 1000 बेड पर दो व्यक्तियों की योजना बनाई गई है। जिसपर प्रदेश सरकार को ठोस कदम उठाना चाहिये ताकि सभी लोगों को उसका लाभ मिले।

प्रदेश सरकार को नाम बदलना छोड़ कर प्रदेश की स्थिति पर बारीकी से ध्यान देना चाहिये और उसको खत्म करने का प्रयास करना चाहिये जिस पैसे को सरकार शहरों के नये नामकरण में खर्च कर रही है उस पैसे से बच्चों की शिक्षा, गरीबों के लिये बेहतर स्वास्थ्य सुविधा, और युवाओं के रोजगार हेतु खर्च करना चाहिये।

इन सब बातों को ध्यान देते हुये नाम बदलने की राजनीति बन्द होनी चाहिये और अगर नाम बदलना आवश्यक हो तो उसके लिये एक गैर राजनीतिक कमेटी बननी चाहिये जो नया नामकरण कर के वाजिब तर्क दे।

लेखक:- आशुतोष कुमार सिंह
राजेश पांडेय लॉ कॉलेज से लॉ के छात्र है, एवं युवा आन्दोलनों में संघर्षरत रहते है।

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Ref. Links:
  1. https://www.india.com/hindi-news/uttar-pradesh/up-government-told-21-lakh-39-thousand-811-registered-unemployed-in-uttar-pradesh/
  2. https://navbharattimes.indiatimes.com/metro/lucknow/other-news/chief-minister-of-uttar-pradesh-yogi-adityanath-says-bjp-will-fight-2019-loksabha-elections-on-prime-minister-narendra-modi-achievements/articleshow/65633022.cms
  3. https://www.patrika.com/gorakhpur-news/851-children-death-in-brd-medical-college-1-1870309/
  4. https://www.patrika.com/allahabad-news/up-health-minister-siddharth-nath-singh-controversial-poster-viral-on-social-media-hindi-news-1714805/



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