google.com, pub-1670991415207292, DIRECT, f08c47fec0942fa0 बेरोजगारी एक राष्ट्रीय आपदा - Hindi Article on Unemployment - Hindi Top News| हिंदी टॉप न्यूज़

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बेरोजगारी एक राष्ट्रीय आपदा - Hindi Article on Unemployment

भारत में एक राष्ट्रीय आपदा तेजी से बढ़ रहा है, उस आपदा का नाम है बेरोजगारी लागातार साल दर साल बेरोजगारी युवाओं पर कहर डालने को खड़ी है जिस सरकार को युवाओं ने अपने रोजगार के लिये चुना वो सरकार चुप्पी साध कर बैठी है लगभग 44 लाख लोग प्रतिवर्ष बेरजोगारों की लाइन में आकर खड़े हो जाते है। बेरोजगारी का पहला और सबसे मुख्य कारण जनसंख्या में निरंतर वृद्धि होना है। भारत में जनसंख्या 25 प्रतिशत  वार्षिक डर से बढ़ रही है। वर्ष 1983 से 2013 तक भारत में बेरोजगारी की दर औसत 7.32 प्रतिशत के साथ सबसे अधिक 9.40 प्रतिशत थी और 2013 में यह रिकॉर्ड 4.90 प्रतिशत थी। फिर 2014 से  4.3 प्रतिशत हुई।

बेरोजगारी की वजह से गंभीर सामाजिक-आर्थिक मुद्दे इससे न केवल एक व्यक्ति बल्कि पूरा समाज प्रभावित होता है। यह कथन बिल्कुल सत्य होना चाहिये की बेरोजगारी में वृद्धि होने से देश मे गरीबी की भी वृद्धि हुई है। देश के आर्थिक विकास को बाधित करने में बेरोजगारी मुख्यतः जिम्मेदार है इसके साथ ही अपराध दर् में भी वृद्धि हुई है। एक उपयुक्त नौकरी की तलाश में असमर्थ बेरोजगार आमतौर पर अपराध का रास्ता चुन लेता है क्योंकि यह पैसा कमाने का आसान तरीका है। लूट, चोरी, छीनाझपटी और अन्य भयंकर अपराधों के तेजी से बढ़ते हुये मामले भी बेरोजगारी का मुख्य कारण है।

वर्ष 2014 में भारत के प्रधानमंत्री  श्री नरेन्द्र मोदी ने एक चुनावी वायदा किया था कि प्रतिवर्ष एक करोड़ रोजगार मिलेगा या युवा अब स्वरोजगार होगा मुद्रा योजना के तहत युवाओं को लोन दिया जायेगा और युवा अपना खुद का व्ययसाय करेगा। और फिर उसी पढ़े-लिखे युवा का मजाक उड़ाया गया की पकौड़े तलना भी एक रोजगार है। सरकारी आंकड़ों के हिसाब से तीन लाख करोड़ रुपयों से अधिक की धनराशि युवाओं को उपलब्ध कराई गई है जिससे 9 करोड़ युवाओं को स्वरोजगार दिलाया गया।फिर भी देश में बेरोजगारी महज 0.8 प्रतिशत ही घटी जो आज नवंबर 2018 में 3.5 प्रतिशत है और धीरे धीरे आगे की ओर बढ़ रही है।

मेरे ख्याल से अब हम युवाओं को वही सरकार चुननी चाहिये जो रोजगार गारंटी दे कि अगर युवा पढ़ लिख कर अपनी डिग्री हासिल कर लेता है तो उसे दर दर भटकने की जरूरत नहीं रहे तुरन्त रोजगार मिले ताकि वो अपने परिवार का पालन पोषण कर सके।

लेख- आशुतोष कुमार सिंह 
( Law Student From Rajesh Pandey Law College ambedkar nagar )

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